#HindiPoem1
जब कुछ हुआ ही नहीं, तो भी कुछ हुआ क्यों है
कुछ बड़ा कहा ही नहीं, तो भी दिल पर लगा क्यों है
बात वहीं क्यों होती है, जहाँ कोई बात ही नहीं हो
समझ शायद कम पड़ गयी है
या फिर हो गए हैं ज़्यादा समझदार हम?
जहाँ चुभना चाहिये वहाँ चुभता नहीं
जहाँ चुभन ही नहीं, वहीँ दुखता है
नादान हैं शायद हम
या फिर हो गए हैं ज़्यादा चालाक?
क्यों कोई छोटी सी बात घर कर जाती है
किसी करीब शख्स की ज़ात दिखा जाती है
टनों का लाद ले आती हैं
कई सवालात संग आ जाती है
क्या हमें भूल जाना चाहिए
या गौर करना चाहिए
बात छोटी ही सही मगर है तो बड़ी
खुद के ही दो प्रतिबिम्ब मानो कर रहें हो बहस
हल पाने मेरी दुविधा का
कि तू सही या तू सही!
जब कुछ हुआ ही नहीं, तो भी कुछ हुआ क्यों है
कुछ बड़ा कहा ही नहीं, तो भी दिल पर लगा क्यों है
बात वहीं क्यों होती है, जहाँ कोई बात ही नहीं हो
समझ शायद कम पड़ गयी है
या फिर हो गए हैं ज़्यादा समझदार हम?
जहाँ चुभना चाहिये वहाँ चुभता नहीं
जहाँ चुभन ही नहीं, वहीँ दुखता है
नादान हैं शायद हम
या फिर हो गए हैं ज़्यादा चालाक?
क्यों कोई छोटी सी बात घर कर जाती है
किसी करीब शख्स की ज़ात दिखा जाती है
टनों का लाद ले आती हैं
कई सवालात संग आ जाती है
क्या हमें भूल जाना चाहिए
या गौर करना चाहिए
बात छोटी ही सही मगर है तो बड़ी
खुद के ही दो प्रतिबिम्ब मानो कर रहें हो बहस
हल पाने मेरी दुविधा का
कि तू सही या तू सही!
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